"जो जीना चाहते हैं, वो रास्ता ढूंढ़ लेते हैं। बाकी सिर्फ़ कैद रहते हैं।"
हिंदी में कहें तो – the shawshank redemption in hindi
याद कीजिए वह सीन: जब एंडी जेल के स्पीकर पर मोज़ार्ट का ऑपेरा बजा देता है। पूरी जेल की सन्नाटा हो जाती है। रेड कहता है – "हम समझ नहीं पाए कि वे दो इतालवी औरतें क्या गा रही थीं, लेकिन उस पल हर सलाख ने अपना अर्थ खो दिया।" "जो जीना चाहते हैं
हिंदी सिनेमा के अंदाज में कहें तो ये कहानी है नाम के शेयर बाजार के जादूगर की, जिसे एक ऐसा जुर्म करने का झूठा इल्जाम लगता है जो उसने कभी किया ही नहीं। उसकी सजा है – दो बार की उम्र कैद (लाइफ + लाइफ)। जेल की दीवारें और उम्मीद का जहर फिल्म का सबसे बड़ा तत्व है "इंस्टीट्यूशनलाइजेशन" (जेल का मानसिक बनावट)। जब आप किसी सिस्टम में बहुत दिनों तक बंद रहते हो, तो वह सिस्टम आपका खून बन जाता है। ब्रूक्स (पुस्तकालयाध्यक्ष) की कहानी तो रूह कंपा देने वाली है। बाहर आकर वह जी नहीं पाता, क्योंकि उसकी असली जेल बाहर के समाज की थी। हिंदी में कहें तो – "जंजीरें टूट गईं, मगर आदतें न टूटीं"। नौकरी में फंसा
एंडी गटर (सीवर) में से रेंगकर बाहर निकलता है – बारिश में खड़ा होकर आसमान की तरफ देखता है। यह सीन सिनेमा के इतिहास का सबसे शुद्ध आनंद है। वह बारिश उसके ऊपर से उसका डर, उसकी सजा और उसकी निराशा धो देती है। ईमानदारी से कहूं तो – कोई नहीं । एकमात्र शिकायत ये हो सकती है कि फिल्म बहुत धीमी है। लेकिन वह धीमापन ही इसकी ताकत है। जैसे कोई पुरानी किताब पढ़ते हुए आप हर शब्द में उतरते हैं, वैसे ही ये फिल्म आपमें उतरती है। हिंदी दर्शकों के लिए विशेष नोट अगर आपने अग्निपथ (पुरानी) का वो संवाद सुना है – "ये मौत का सौदागर नहीं... जीवन का है" – तो शॉशैंक उसी तरह का काव्य है। अगर आप 3 इडियट्स में रैचो के "आल इज वेल" वाले दर्शन से जुड़ते हैं, तो एंडी का "होप इज ए गुड थिंग" आपके दिल को छू लेगा। अंतिम फैसला द शॉशैंक रिडेम्पशन सिर्फ एक जेल ड्रामा नहीं है। यह एक आध्यात्मिक यात्रा है। यह हर उस इंसान को देखनी चाहिए जो लगता है कि उसकी जिंदगी एक कैद है – शादी में फंसा, नौकरी में फंसा, कर्ज में फंसा या फिर अपनी ही सोच में कैद।