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Constantine In Hindi -

कॉन्स्टेंटाइन के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना 312 ईस्वी में घटी। रोम की ओर बढ़ते समय, उनका सामना प्रतिद्वंद्वी सम्राट मैक्सेंटियस से हुआ। कहा जाता है कि इससे पहले कॉन्स्टेंटाइन ने आकाश में एक चमकता हुआ क्रॉस देखा जिस पर लिखा था - "इस निशान में तू जीतेगा" (In Hoc Signo Vinces)।

कॉन्स्टेंटाइन ने सिर्फ ईसाई धर्म को स्वतंत्रता ही नहीं दी, बल्कि उसके भीतर एकता स्थापित करने का भी प्रयास किया। 325 ईस्वी में उन्होंने 'निकिया की परिषद' (Council of Nicaea) बुलाई। यह ईसाई इतिहास की पहली विश्वव्यापी परिषद थी, जिसमें ईसा मसीह के देवत्व और त्रिएकत्व (ट्रिनिटी) सिद्धांत को मान्यता दी गई। इस परिषद ने नाइसिन पंथ (Nicene Creed) की रचना की, जो आज भी कई ईसाई संप्रदायों में प्रार्थना का हिस्सा है। constantine in hindi

प्रभावित होकर, कॉन्स्टेंटाइन ने अपने सैनिकों की ढालों पर ईसाई प्रतीक 'क्राइस्टोग्राम' (Chi-Rho) बनवा दिया। मिल्वियन ब्रिज के युद्ध में उन्होंने मैक्सेंटियस को बुरी तरह पराजित किया। यह जीत रोमन साम्राज्य के लिए तो चरम पर थी ही, साथ ही इसने कॉन्स्टेंटाइन को ईसाई धर्म की तरफ झुका दिया। हालाँकि उनका पूर्ण बपतिस्मा अपने जीवन के अंतिम समय (337 ईस्वी) में हुआ, लेकिन इस घटना के बाद से वे ईसाई धर्म के संरक्षक बन गए। constantine in hindi

कॉन्स्टेंटाइन ने एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने रोम को छोड़कर बोस्फोरस जलडमरूमध्य के किनारे बसे प्राचीन शहर 'बीजान्टियम' को नई राजधानी बनाने का फैसला किया। 330 ईस्वी में इस शहर का उद्घाटन हुआ और इसे 'नोवा रोमा' (न्यू रोम) नाम दिया गया, लेकिन यह 'कॉन्स्टेंटिनोपल' (आज का इस्तांबुल) के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह शहर अगले हज़ार सालों तक ईसाई दुनिया की राजधानी रहा। constantine in hindi

कॉन्स्टेंटाइन एक जटिल शख्सियत थे। एक ओर, उन्होंने ईसाई धर्म को उत्पीड़न से मुक्ति दिलाई और उसे साम्राज्य का प्रमुख धर्म बनाया। दूसरी ओर, वे अपने निजी जीवन में क्रूर भी थे — उन्होंने अपनी पत्नी फ़ॉस्टा और अपने बड़े बेटे क्रिस्पस को मौत की सज़ा दी थी।