रघु दूसरी मीनार के छोर पर पहुँचता है। लेकिन वह रुकता नहीं—वह पलटता है और
मुंबई के गलियारों में पला-बढ़ा रघु (सचिन) बचपन से ही ऊँचाईयों का दीवाना था। जादू के करतब सीखने वाला यह गरीब लड़का जब पहली बार सर्कस में टाइटरोप पर चलते कलाकार को देखता है, तो उसकी ज़िंदगी बदल जाती है। the walk movie in hindi
हवा चलती है। तार हिलता है। रघु के पैर काँपते हैं। उसे अपनी माँ की बात याद आती है— "पैर ज़मीन पर रखना।" बस चलते जाना है..." THE END
"डरना मना है, बस चलते जाना है..." THE END the walk movie in hindi