बच्चों की साहित्य की दुनिया में कुछ किताबें ऐसी हैं जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी बच्चों का दिल जीतती रही हों। 'मिस्टर पॉपर के पेंगुइन' (Mr. Popper's Penguins) उन्हीं में से एक है। यह किताब, जिसे रिचर्ड और फ्लोरेंस एटवाटर (Richard and Florence Atwater) ने लिखा है, सन् 1938 में प्रकाशित हुई थी, लेकिन आज भी उतनी ही ताजा और मजेदार लगती है। आइए जानते हैं इस अनोखी कहानी के बारे में।
अब शुरू होती है असली मस्ती। पेंगुइन को घर में रखना इतना आसान नहीं था। कैप्टन कुक को फ्रिज (refrigerator) में रहना पसंद था, वह घर के हर कोने में अपनी चोंच मारता और सबसे मजेदार बात – वह पानी से बहुत प्यार करता था। जल्द ही, श्रीमान पॉपर के पास दूसरा पेंगुइन आ जाता है, जिसका नाम है । और फिर क्या? धीरे-धीरे उनके पास पेंगुइन्स का एक पूरा परिवार (कई छोटे बच्चे) हो जाता है। mr. popper's penguins in hindi
कहानी है श्रीमान पॉपर (Mr. Popper) की, जो एक साधारण चित्रकार (house painter) हैं। वे एक छोटे से शहर में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं। श्रीमान पॉपर की एक खासियत है – उन्हें दूर-दराज के इलाकों की खोज और ध्रुवों (Poles) की यात्राओं के बारे में पढ़ना बहुत पसंद है। उनका सपना है कि काश वे भी कभी एक्सप्लोरर (explorer) बन पाते। mr. popper's penguins in hindi